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असल में

कलम घस रहे है हम
गुमान है बदल रहे है हम
असल में हाथ मल रहे है हम
हिन्दू मुसलमान के झगड़े
गोरक्षा गोशाला के झगड़े
देश प्रेम देश द्रोह के झगड़े
इनमें बेसूद उलझ रहे है हम
असल में हाथ मल रहे है हम
मुफ़लिसों के सपने बिखर गए
प्यास से शहर के शहर उजड़ गए
फ़ाको से बच्चे बेमौत मर गए
मौज मस्ती में मर रहे है हम
असल में हाथ मल रहे है हम
है ही नहीं मुम्किन कि आये
जो ला सके ले आये
अब आएगा तब आएगा
जब भी जैसे भी पर इंक़लाब आएगा
इस आस में मुन्तज़िर--फरदा बैठे है हम
असल में हाथ मल रहे है हम
रिन्दों के शहज़ादे 
ज़रा सी ज़हमत करे 
घर से निकले आवाज़ उठाए
हाथ बढ़ाए सर फुड़वाए  
कुछ तो करे कि जिससे 
अगली नस्लों का कर्ज उतारे
कल वो भी कह दे की 
कलम घस रहे थे हम
गुमान था बदल रहे थे हम
असल में हाथ मल रहे थे हम

गुमान = doubt
बेसूद = without thinking
मुफ़लिसों = poor
फ़ाको = malnutrition
मुन्तज़िर--फरदा = waiting for tomorrow
रिन्दों = drunkard
ज़हमत = hardship

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