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एक ज़माना था जवान थे हम भी

आशिक़ हूँ प माशूक़-फ़रेबी है मेरा काम
मजनूँ को बुरा कहती है लैला मिरे आगे
- मिर्ज़ा ग़ालिब


एक ज़माना था जवान थे हम भी
था एक दौर बज़्म-ए-जान थे हम भी

वक़्त ने अधेड़ के रख दिया वगरना
हुस्न के ज़लज़लों पर तूफान थे हम भी

रोज़ ही लगती थी इश्क़ की बाज़ी
रक़ीब की मौत का सामान थे हम भी

मत पूछो उस दौर की हकीकत दोस्तो
मैदान-ए-इश्क़ के हुक्मरान थे हम भी

छिड़ी है बात तो ये एलान-ए-हक़ भी हो
सेकड़ो के हासिल-ए-जहान थे हम भी


माशूक़-फ़रेबी - deception of the beloved
बज़्म-ए-जान - centre of attraction
ज़लज़लों - earthquake
रक़ीब - opponent, one wying for your beloved
मैदान-ए-इश्क़ - battlefield for love
हुक्मरान - ruler
एलान-ए-हक़ - demanding one's right
हासिल-ए-जहान - winning the world

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