Skip to main content

Posts

Recent posts

पहले तुझे पाने का मज़ा जाता रहा

पहले   तुझे   पाने   का   मज़ा   जाता   रहा उसपे   तुझे  छूने  का   मज़ा   जाता   रहा pehle tujhe paane ka mazaa jaata raha uspe tujhe chune ka mazaa jaata raha जब   से   हम   साथ   चलने   लगे   मेरे   हमकदम गिरके   संभलने   का   मज़ा   जाता   रहा   jab se hum saath chalne lage mere humkadam girke sambhalne ka mazaa jaata raha जब   से   हम   सात   फेरे   के   हसीं   रिश्ते   में   बंधे मिलने   ओ   बिछड़ने   का   मज़ा   जाता   रहा   jab se hum saat phere ke hasii rishte mein bandhe milne o bichadne ka mazaa jaata raha   जब   से   खिल   खिल   के   हसने   लगे   तेरे   साथ   हम तन्हा   तर - ब - तर   होने   का   मज़ा   जाता   रहा jab se khil khil ke hasne lage tere saath hum tanha tar-ba-tar ka mazaa j...

मैं टूट के इश्क़ कर नहीं सकता

मैं टूट के   इश्क़   कर   नहीं   सकता शौक   हद   से   गुज़र   नहीं   सकता main toot ke ishq kar nahin sakta shauq had se guzar nahin sakta जितने  किये   थे  वायदे  याद  है पर वादा - शिकन   बदल   नहीं   सकता jitne kiye the vaayde yaad hai par vaadaa shikan badal nahin sakta मुझ को वफ़ा बेदार  रखनी   थी अब   वो   पथ्थर   पिघल   नहीं   सकता mujh ko vafaa bedaar rakhni thi ab vo patthar pighal nahin sakta तेरी   वफ़ा   पल पल  मुझे कोसेगी वो  खता   हाय   बदल   नहीं   सकता teri vafaa pal pal mujhe kosegi vo khata haay badal nahin sakta   मेरे   ही   बुने   जाल   में   फस   गया   हु चाहू   भी   तो   निकल   नहीं   सकता mere hi bune jaal mein phas gaya hu chaahu bhi to nikal nahin sakta शौक़  : passion वादा - शिकन  : one who breaks promises बेदार  :  vigilant ...

फ़र्क़

उनके बेशुमार तरफ़दारो से उनके खेमे के पहरेदारों से उनकी झूठी उथली बातों से उनकी सोची समझी चालों से जब तक बन पड़े  लड़ेंगे हम देर - ओ - हरम के ठेकेदारों से पाप पुण्य के जागीरदारों से ज़ुल्मत  बेचते  दुकानदारों से आप बन बैठे परवर्दिगारों से जब तक बन पड़े  लड़ेंगे हम ये जीत या हार की बात नहीं है ये बात मनवाने की बात नहीं है ये बात से बात चलाने की बात नहीं है गौर से  देखो तो  बात  सिर्फ इतनी है वो नफरतों का बाग़ है   और हम  मोहोब्बतों का गुलाब है | बेशुमार : innumerable उथली : shallow देर - ओ - हरम : temple and mosque ज़ुल्मत : darkness; ignorance

बच्चों के नाम

मेरी बात सुनो बेटा बात करो  मैं कबसे चुप ज़रा गौर करो तेरे छुटपन में मुझे वक़्त नहीं था चाहा था जैसा मैं वैसा शजर नहीं था अब जी चाहता है तुझे पास बुलाऊ पास बुलाके सीने से लगाऊँ कंधे पे बिठाऊँ घोड़ा बन जाऊँ ये नहीं सहल है यही तेरा कल हैं पर कल की चिंता कभी मत करना एक बात कहु हु उसे याद रखना तेरी राह सही हैं डटकर चलना कल बेहतर हो यही कोशिश करना यही कोशिश थी सो   मेरे बाप से मेरा मुझसे तेरा  कल सुधर गया है  कल निखर गया है  शजर = tree  सहल = easy 

फकत ये नोट ही रह जायेंगे क्या

फकत ये नोट ही रह जायेंगे क्या हम और कुछ न कमा पाएंगे क्या आ गई हो तो शामिल क्यों नहीं होती दूर से मेरे जल्वे दिख जाएंगे क्या तर्क - ए - मय की इब्तदा कर तो दी अंजाम से निबाह कर पाएंगे क्या और कितना सब्र बहार आने को गुल - ए - फ़र्दा मुर्जा न जाएंगे क्या रहेंगे याद किस तरह तुमको इस दर्द की दवा कर पाएंगे क्या दिखाई शक्ल मुद्दत से न यारों को उनकी फ़िक्र  से भी उतर जाएंगे क्या निखारा खाक से उठाकर उर्दू मुझे ये कर्ज़े नोटों से चुक   पाएंगे क्या   तर्क - ए - मय =abandonment of liquor इब्तदा = to begin निबाह = carrying on / constancy  गुल - ए - फ़र्दा  = flowers of tomorrow  फ़िक्र = thoughts