होती ऐसी जगह कि घास का बिस्तर होता आसमान की चादर होती न रोज़गार का झमेला होता न कामयाबी की होड़ होती एक घर होता जिसे रोशन सवेरा करता एक कमरा होता जो हमसे बात करता होता एक बगीचा जिसका तू बागबां होता एक दर होता जिसे देख मेरा इंतज़ार होता शब जो बिखरती सितारों की रोशनी होती बादलोँ की ओट से चांदनी लोरी सुनाती रात से लंबी नींद होती नींद से लंबे ख्वाब होते ख्वाब जो हक़ीक़त में बेशक तमाम होते कोई न तीसरा होता एक तुम होती एक मैं होता घंटो हँसना होता न फिक्र कोई न कोई वादा-ए-वफ़ा होता मेरा वक़्त सिर्फ तुम्हारा होता तुम्हारा शबाब सिर्फ मेरा होता तुम मेरी राज़दार होती मैं तुम्हारा एतबार होता तेरे बगीचे का पौधा जब शजर की सूरत लेता धूप में तपे बूढ़े बदन को छाँव का ठंडा लम्स देता उसी शजर की बेल से झूलता हिंडोला होता जहाँ तेरी अघोष में रख के सर मैं दम तोड़ता। बागबां = Gardener शब = night ओट = from behind वादा-ए-वफ़ा = promise of faithfulness शबाब = beauty राज़दार = confidant एतबार = trust शजर = tree लम्स = t...
My impressions in my words