फकत ये नोट ही रह जायेंगे क्या हम और कुछ न कमा पाएंगे क्या आ गई हो तो शामिल क्यों नहीं होती दूर से मेरे जल्वे दिख जाएंगे क्या तर्क - ए - मय की इब्तदा कर तो दी अंजाम से निबाह कर पाएंगे क्या और कितना सब्र बहार आने को गुल - ए - फ़र्दा मुर्जा न जाएंगे क्या रहेंगे याद किस तरह तुमको इस दर्द की दवा कर पाएंगे क्या दिखाई शक्ल मुद्दत से न यारों को उनकी फ़िक्र से भी उतर जाएंगे क्या निखारा खाक से उठाकर उर्दू मुझे ये कर्ज़े नोटों से चुक पाएंगे क्या तर्क - ए - मय =abandonment of liquor इब्तदा = to begin निबाह = carrying on / constancy गुल - ए - फ़र्दा = flowers of tomorrow फ़िक्र = thoughts
My impressions in my words