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Showing posts from February, 2018

मौका भी था दस्तूर भी

उड़ गई यूँ वफ़ा ज़माने से कभी गोया किसी में थी ही नहीं - Daag Dehelvi मौका भी था दस्तूर भी धोका भी था कसूर भी की जफ़ा और निभाता रहा अजब है वफ़ा का दस्तूर भी फ़न की नाज़ुकी से बेदार था अपने होने का था ग़ुरूर भी बचपन से बड़ो को सताता था यही लड़कपन बना नासूर भी शख्शियत कमजोर थी ' आकाश ' गैरमामूली होने से था मग़रूर भी । गोया = as if दस्तूर = tradition जफ़ा = being unfaithful फ़न की नाज़ुकी से बेदार = mindful of the shortcomings of own work ग़ुरूर = pride नासूर = chronic/unhealed wound गैरमामूली = unique/unusual मग़रूर = proud/arrogant