मेरी बात सुनो बेटा बात करो मैं कबसे चुप ज़रा गौर करो तेरे छुटपन में मुझे वक़्त नहीं था चाहा था जैसा मैं वैसा शजर नहीं था अब जी चाहता है तुझे पास बुलाऊ पास बुलाके सीने से लगाऊँ कंधे पे बिठाऊँ घोड़ा बन जाऊँ ये नहीं सहल है यही तेरा कल हैं पर कल की चिंता कभी मत करना एक बात कहु हु उसे याद रखना तेरी राह सही हैं डटकर चलना कल बेहतर हो यही कोशिश करना यही कोशिश थी सो मेरे बाप से मेरा मुझसे तेरा कल सुधर गया है कल निखर गया है शजर = tree सहल = easy
My impressions in my words