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Showing posts from September, 2020

अरमां जिनको छूने की हैसियत नहीं थी आज मेरा हाथ चूमते है

अरमां जिनको छूने की हैसियत नहीं थी आज मेरा हाथ चूमते है  क्या वाक़ई इनके काबिल हु मैं हर सुबह ये सवाल पूछते है नया देस है बदला हुआ भेस है नए असरात हो ये लाज़िम है असरात कितने हल्के कितने गहरे हो तय मेरा माज़ी करते है नहीं आसान ख्वाबों को जीना कुछ पाने के लिए कुछ खोना होता है कितना कुछ खोया और आखिर क्या पाया ताउम्र यही सोचते है लिये हाथ में जाम हर एक शाम खास दोस्तो के साथ गुज़रती थी अब जाम खाली है आंगन सूना है फिर मिलने का बहाना ढूंढते हैं