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Showing posts from 2022

मैं टूट के इश्क़ कर नहीं सकता

मैं टूट के   इश्क़   कर   नहीं   सकता शौक   हद   से   गुज़र   नहीं   सकता main toot ke ishq kar nahin sakta shauq had se guzar nahin sakta जितने  किये   थे  वायदे  याद  है पर वादा - शिकन   बदल   नहीं   सकता jitne kiye the vaayde yaad hai par vaadaa shikan badal nahin sakta मुझ को वफ़ा बेदार  रखनी   थी अब   वो   पथ्थर   पिघल   नहीं   सकता mujh ko vafaa bedaar rakhni thi ab vo patthar pighal nahin sakta तेरी   वफ़ा   पल पल  मुझे कोसेगी वो  खता   हाय   बदल   नहीं   सकता teri vafaa pal pal mujhe kosegi vo khata haay badal nahin sakta   मेरे   ही   बुने   जाल   में   फस   गया   हु चाहू   भी   तो   निकल   नहीं   सकता mere hi bune jaal mein phas gaya hu chaahu bhi to nikal nahin sakta शौक़  : passion वादा - शिकन  : one who breaks promises बेदार  :  vigilant ...

फ़र्क़

उनके बेशुमार तरफ़दारो से उनके खेमे के पहरेदारों से उनकी झूठी उथली बातों से उनकी सोची समझी चालों से जब तक बन पड़े  लड़ेंगे हम देर - ओ - हरम के ठेकेदारों से पाप पुण्य के जागीरदारों से ज़ुल्मत  बेचते  दुकानदारों से आप बन बैठे परवर्दिगारों से जब तक बन पड़े  लड़ेंगे हम ये जीत या हार की बात नहीं है ये बात मनवाने की बात नहीं है ये बात से बात चलाने की बात नहीं है गौर से  देखो तो  बात  सिर्फ इतनी है वो नफरतों का बाग़ है   और हम  मोहोब्बतों का गुलाब है | बेशुमार : innumerable उथली : shallow देर - ओ - हरम : temple and mosque ज़ुल्मत : darkness; ignorance