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Showing posts from January, 2018

गूंजे सदियों तक वो आवाज़ हूँ

गूंजे सदियों तक वो आवाज़ हूँ मैं अपने दौर का इतिहास हूँ है मुझी से शनाख्त इसकी क़यामत तक ये वक़्त लहजा मेरा मैं इसका लिबास हूँ पल भर की शोहरत यहां पल भर में रुसवाई दौर - ए - होशियार का अंजाम दौर - ए - रफ़्तार का आग़ाज़ हूँ बीता लड़कपन हासिल - ए - जहां की तयारी में बेबसी से लबरेज़ आलम का एहसास हूँ गम - ए - रोज़गार के मलबे में धसे हुए ज़माने   ' आकाश ' शायर वो भी रेख्ता का , एजाज़ हूँ । शनाख्त = identification लहजा = articulation रुसवाई = dishonor दौर - ए - होशियार = period of shrewdness दौर - ए - रफ़्तार = period of high tempo हासिल - ए - जहां = winning the world लबरेज़ = overflowing गम - ए - रोज़गार = worries of attaining livelihood रेख्ता = ancient word for Urdu एजाज़ = astonishment