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आएंगे टेढ़े मोड़ रास्ते में कई मगर चलना तो होगा


आएंगे टेढ़े मोड़ रास्ते में कई मगर चलना तो होगा
जब भी लगेगी ज़माने की ठोकर संभलना तो होगा

तुम नहीं बदलना चाहते बदलो मगर यह तय रहे
ज़माना बदल रहा है और हमें भी बदलना तो होगा


हर वक़्त सुनते है किसी की कामयाबी की खबर
हमें भी आवारगी भूल खुदको आज़माना तो होगा


मस्लहत को ढाल बना हम जवान तो हो गए लेकिन
भोला बचपन जो क़त्ल हुआ उसे तलाशना तो होगा

पर काट सदियों कैद रक्खा पिंजरे में इक चिड़िया को
अब्र पे बनाया उसने अपना मकान सराहना तो होगा

सच है असीम ताकत होती है जहाज़ों की मगर
बहर में छुपे है सेकड़ो तूफ़ान डरना तो होगा

है कब ये मुम्किन गुलिस्तां के सारे फूल एकरंगी हो
फिर भी है दिलों में क्यों ये ख़्वाहिश सोचना तो होगा।
आवारगी = free thinking
मस्लहत = maturity
अब्र = cloud
असीम = infinite
बहर = ocean
गुलिस्ता = garden
एकरंगी = one color

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