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मेरे लबों पर बिखरी हुई हँसी हो तुम

मेरे लबों पर बिखरी हुई हँसी हो तुम
आके वापस न जानेवाली खुशी हो तुम


मुमकिन नहीं सर-ए-राह छोड़ दु तुम्हें 
मेरी हमनफस मेरी हमनशीं हो तुम


बेशक इस रिश्ते का मैं ही हु कातिल
सारे इल्ज़ामों से बाइज़्ज़त बरी हो तुम


मेरे बेसबब अफ़साने को मायने दे
पुरतरतिब जोड़ती कड़ी हो तुम


यू नहीं कि तुझसे हसीं शक्ल नहीं देखी
यू कि सब हसीनाओं से बेहद जहीं हो तुम


उम्मीद तो थी कि थाम ही लोगी आखिर
उम्र में मुझसे कुछ दिन बड़ी हो तुम ।।


सर-ए-राह = middle of the road
हमनफस = like minded friend
हमनशीं = sitting next to you
बरी = acquitted
बेसबब अफ़साने = meaningless story
पुरतरतिब = with perfect arrangement
जहीं = intelligent, mature

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