उड़ गई यूँ वफ़ा ज़माने सेकभी गोया किसी में थी ही नहीं- Daag Dehelvi
मौका भी था दस्तूर भी
धोका भी था कसूर भी
की जफ़ा और निभाता रहा
अजब है वफ़ा का दस्तूर भी
फ़न की नाज़ुकी से बेदार था
अपने होने का था ग़ुरूर भी
बचपन से बड़ो को सताता था
यही लड़कपन बना नासूर भी
शख्शियत कमजोर थी 'आकाश'
गैरमामूली होने से था मग़रूर भी ।
गोया = as if
दस्तूर = tradition
जफ़ा = being unfaithful
फ़न की नाज़ुकी से बेदार = mindful of the shortcomings of own work
ग़ुरूर = pride
नासूर = chronic/unhealed wound
गैरमामूली = unique/unusual
मग़रूर = proud/arrogant
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