गूंजे सदियों तक वो आवाज़ हूँ
मैं अपने दौर का इतिहास हूँ
है मुझी से शनाख्त इसकी क़यामत तक
ये वक़्त लहजा मेरा मैं इसका लिबास हूँ
पल भर की शोहरत यहां पल भर में रुसवाई
दौर-ए-होशियार का अंजाम दौर-ए-रफ़्तार का आग़ाज़ हूँ
बीता लड़कपन हासिल-ए-जहां की तयारी में
बेबसी से लबरेज़ आलम का एहसास हूँ
गम-ए-रोज़गार के मलबे में धसे हुए ज़माने
'आकाश' शायर वो भी रेख्ता का, एजाज़ हूँ ।
शनाख्त = identification
लहजा = articulation
रुसवाई = dishonor
दौर-ए-होशियार = period of shrewdness
दौर-ए-रफ़्तार = period of high tempo
हासिल-ए-जहां = winning the world
लबरेज़ = overflowing
गम-ए-रोज़गार = worries of attaining livelihood
रेख्ता = ancient word for Urdu
एजाज़ = astonishment
Comments
Post a Comment