बरसों पहले एक
सौदा किये
बड़ा नुकसान हुआ क्या
किये
एक इल्म जिसमें
उलझे रहे
एक इल्म जिसका
नशा किये
शब-ओ-रोज़
वक़्त के पाबंद
फुरसत-ए-गुनाह
को तरसा किये
गैर ऐसे जो
क़ाइल हुए
यार ऐसे जो
टोका किये
न दीवाने हुए न
होशियार
मुकम्मल एक काम
भी ना किये
नाकामियां आस्तीन खिंचती रही
हौसला मंज़िल की ओर
ढकेला किये
ये मलाल की
लौट नहीं सकते 'आकाश'
ये राहत कि
आग़ाज़-ए-इल्म
बरपा किये ।।
इल्म =
knowledge, talent, expertise
शब-ओ-रोज़
= day and night
पाबंद =
bound
फुरसत-ए-गुनाह
= freedom to sin
क़ाइल =
convince
मुकम्मल =
complete
आस्तीन =
sleeve
मलाल =
regret
आग़ाज़-ए-इल्म
= beginning of expertise afresh
बरपा = happen
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